शांति शिवालय भी कहा जाने वाला विश्व शांति स्तूप बिहार का एक प्रसिद्ध ऐतिहासिक स्तंभ है, जो पुरे विश्व को आकर्षित करता है | प्राचीन समय में मगध राजवंश की पहली राजधानी रह चुके राजगीर में यह स्थित है | शांति स्तूप बुद्ध की चार स्वर्ण प्रतिमाओं को स्थापित करते हुए, विश्व शांति के प्रतीक सफेद संगमरमर पत्थर से बना है | और यहाँ यहां रोपवे के माध्यम से पहुँचा जा सकता है |

पहाड़ी के ऊपर बना है यह विश्व शांति स्तूप

राजगीर स्थित पयर्टन स्थल विश्व शांति स्तूप एक प्रसिद्ध पावन स्थल है, जो एक पहाड़ी के ऊपर बसा हुआ है। यहां पर पहुँचने का सिर्फ एक ही साधन है और वह है रोपवे यानी रस्सी का मार्ग अर्थात इसी रस्सी के द्वारा उस स्तूप तक पहुंचा जा सकता है। यह रोपवे बहुत साधारण सा है, जिसमें बैठने के लिए एक कुर्सी है जिसमें एक समय पर एक ही व्यक्ति बैठ सकता है। यह एक लोहे के रॉड से ऊपर की मजबूत रस्सी से जुड़ा हुआ है। आधे रास्ते तक पहुँचते-पहुँचते यह सवारी अचानक से थोड़ी डरावनी सी लगती है। रोपवे की यह सवारी लगभग 12 मिनटों की है |

भगवन बुद्ध को समर्पित है यह स्तूप

विश्व शांति स्तूप राजगीर स्थित एक विशाल स्तूप है जो धुँधले से सफ़ेद रंग का है और जिस पर बुद्ध की स्वर्णिम प्रतिमाएँ हैं, जो उनकी विविध मुद्राओं को दर्शाती हैं। यह स्तूप जापानी लोगों द्वारा बनवाया गया था |  यहां पर एक जापानी साधु रहते हैं, जो फूजी बाबा के नाम से जाने जाते हैं, वह इस स्तूप और यहां के मंदिर की देखरेख करते हैं | फ़ूजी बाबा का कक्ष उतना ही मनोहर है जितना कि वहां का स्तूप |  यह कक्ष पहाड़ी की नैसर्गिक चट्टानों के सहारे बनवाया गया था, जो वहां पर मौजूद अन्य सभी वस्तुओं की तरह इस कक्ष का अविभाज्य हिस्सा थे | यहां आने वाले पर्यटक इस कक्ष पर खड़े हो कर राजगीर शहर और उसके आस-पास की जगहों का सुंदर नज़ारा देखते हैं |

शांति शिवालय भी कहा जाता है

शांति शिवालय के नाम से प्रसिद्ध विश्व शांति स्तूप एक ऐतिहासिक स्तंभ है | यहां लोगों को अत्यंत शांति प्राप्त होती है, यहां सैर करने के लिए सर्दी का मौसम सबसे उपयुक्त होता है। रत्नागिरि पर्वत पर स्थित विश्व प्रसिद्ध राजगीर का पर्यटन स्थल विश्व शांति स्तूप शांति और आस्था का केंद्र है। विश्व शांति स्तूप का निर्माण 1978 में गौतम बुद्ध की 2600 जयंती के मौके पर किया गया था |  इस स्तूप का डिजाइन वास्तुकार उपेंद्र महारथी ने तैयार किया था |  स्तूप का गुंबद 72 फुट ऊंचा है और भगवान बुद्ध ने इसी स्थल से विश्व को शांति का उपदेश दिया था |

 

 

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