राजधानी पटना से महज 35 किलोमीटर की दूरी पर स्थित बिहटा का परेव पीतल नगरी के रूप में जाना जाता है,जिसकी  पहचान राज्य में ही नहीं, बल्कि देश में पीतल बर्तनों के बेहतर निर्माण के कारण रही है, लेकिन आज यह उद्योग सरकार की उदासीनता के कारण संकट में है साथ हैं पुराने ढर्रे पर चल रहा यह उद्योग समुचित संसाधन के अभाव में आज दम तोड़ने लगा है तो आधुनिकता की मार ने बची-खुची कसर भी निकाल दी

स्टील व् फाइवर के बर्तनों ने ले ली इनकी जगह

पहले शादीविवाह के अवसर पर बधु पक्ष के लोग वर पक्ष को पीतल और कांसे की बनी बर्तन दान करते थे पर अब इनकी जगह स्टील व् फाइवर के बर्तनों ने ले ली है |  परेव की पहचान परंपरागत तरीके से पीतल, कांसा, जस्ता, एल्यूमिनियम और तांबे के बर्तन निर्माण केंद्र के रूप में रही है |  इस व्यवसाय से इस गांव में करीब दस हजार लोगों को रोजी-रोटी मिलती थी, पर आज स्थिति बेहद दयनीय है इनकी

मजदुर अब पलायन को मजबूर हैं

पीतल नगरी परेव की पहचान परंपरागत तरीके से पीतल, कांसा, जस्ता, एल्युमिनियम, तांबा आदि के बर्तनों के निर्माण के रूप में रही है |  इस व्यवसाय से गांव के करीब दस हजार परिवारों व मजदूरों का पेट भरता है, लेकिन सरकार ने कभी इस उद्योग पर नजर नहीं डाली |  इस कारण यह उद्योग समुचित संसाधन के अभाव में दम तोड़ रहा है और यहां के कारीगर दूसरे शहरों में अपना ठिकाना बनाने के लिए विवश हो गये हैं | कई राजनेताओं के वादे के बावजूद परेव की तस्वीर नहीं बदली और यहां बसे हजारों व्यवसायी व कारीगरों के परिवारों को फजीहत का सामना करना पड़ रहा रहा है |

नेपाल में बने बर्तनों से ज्यादा प्रभावित

परेव में बने बर्तन मजबूत तो हैं, लेकिन देखने में नेपाल के बर्तनों जैसे चमकदार नहीं दिखते, जिससे नेपाल के बर्तनों की बिक्री ज्यादा होने लगी |  दस वर्ष पूर्व परेव के व्यवसायियों के नुकसान को समझते हुए भारत सरकार के सूक्ष्म लघु मध्यम उद्यम मंत्रालय ने दो करोड़ की लागत से यहां सामान्य सुविधा केंद्र का निर्माण कराया ताकि कारीगर अपने हाथों से बनाये बर्तन को भी नेपाल के बने बर्तनों जैसी चमक दे सकें, 18 जुलाई, 2008 को इसका उद्घाटन नीतीश कुमार ने किया था, लेकिन सरकार की अव्यवस्था के कारण आज तक उस कारखाने का पहिया तक नहीं हिल पाया है |  आज तक यह सुविधा केंद्र परेव के व्यवसायियों को कोई सुविधा नहीं दे पाया |  आज स्थिति यह है कि बिजली कार्यालय ने दो लाख पचास हजार बिजली बिल बकाया होने के कारण बिजली भी काट दी है |

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