अगर आप पटना के अतीत के पन्ने को खंगालने तो आपको पटना शहर में कई ऐसे बाजार मिल जायेंगे जिनका इतिहास सैकड़ो वर्ष पुराना है | इन्ही पुराने बाजारों में से एक नाम चितकोहरा बाजार का भी आता है | जब भारत पकिस्तान का बंटवारा हुआ था तो पाकिस्तान के सिंध प्रान्त से आये  कई पंजाबी परिवार का आसरा बना था यह बाजार | आज भी यहां बहुत सारे पुराने दूकान मिल जायेंगे जिन्हे उनके पूर्वजों ने खोला था और आज किसी की तीसरी तो किसी की चौथी पीढ़ी उस दूकान को चला रहे हैं | चितकोहरा के स्वर्णिम युग के गवाह इन दुकानों ने भी आज आधुनिकता की चादर ओढ़ रखी है पर इस बाजार की गलियां आज भी वैसी की वैसी हीं है | 

तो चलिए आपको भी सैर कराते हैं चितकोहरा बाजार का

लगभग 100 वर्ष पुराने इस चितकोहरा बाजार की तूती पुरे बिहार में बोलती थी, क्या कुछ नहीं बिकता था यहाँ | पुरे बिहार से व्यापारी आते थे यहाँ सामानों की खरीद -बिक्री के लिए | सप्ताह में दो दिन लगने वाले इस बाजार की रौनक देखते बनती थी यहाँ आने वाले व्यापारी चितकोहरा बाजार का लजीज कचरी-घुघनी खाना कतई नहीं भूलते थे |

पटना का सौ साल से भी ज्यादा पुराना चितकोहरा थोक मंडी बाजार

वैसे तो यह बाजार सप्ताह में दो दिन रविवार और गुरुवार को लगती है , पर ऐसा भी नहीं है की अन्य दिनों में यहां की दुकाने बंद रहती है लेकिन मार्केट  डे के दिन कुछ अस्थाई दुकानों की संख्या बढ़ जाती है और ग्राहकों की भीड़ भी ज्यादा उमड़ती है |

लोकल पटना के ग्राहक हीं पहुँचते हैं

भले आज चितकोहरा बाजार की पूरी रंगत बदलते समय ने बदल डाली है और अब ग्राहक भी यहां सिर्फ लोकल पटना के हीं पहुँचते हैं, पर आज भी यहां बहुत सारे पुराने दूकान मिल जायेंगे जिन्हे उनके पूर्वजों ने खोला था और आज किसी की तीसरी तो किसी की चौथी पीढ़ी उस दूकान को चला रहे हैं | चितकोहरा के स्वर्णिम युग के गवाह इन दुकानों ने भी आज आधुनिकता की चादर ओढ़ रखी है पर इस बाजार की गलियां आज भी वैसी की वैसी हीं है |

अंग्रेजो के समय का है ये बाजार

जब भारत पकिस्तान का बंटवारा हुआ था तब पकिस्तान के सिंध प्रान्त से कुछ परिवारों का जत्था दिल्ली होते हुए यही आये और बस गए क्योकि उनकी जीविका चलाने के लिए बहुत कुछ मौजूद था यहाँ आज वो पंजाबी कॉलोनी के नाम से जाना जाता है जो चितकोहरा बाजार के बिलकुल सटे है | पटना के बदलते स्वरुप के गवाह बाजारों में कुछ तो फल-फूल रहे हैं पर खास कर अनाज की बिक्री के लिए मशहूर चितकोहरा बाजार आज अपना आस्तित्व बचाने के लिए जूझ रहा है |

पशु भी बिकते थे इस बाजार में

चितकोहरा बाजार अनाजों की बिक्री के लिए तो मशहूर था हीं इसके अलावा बिहार के दूसरे जिले से मवेशी व्यापारी भी यहां पशुओं की खरीद-बिक्री के लिए आते थे | अब जगह के अभाव में पशुओं की बिक्री तो बंद हो गई पर दुकाने नए स्वरुप में सही सलामत है | आज भी ये पटना शहर का इकलौता बाजार है जहां एक जगह घरेलु एवं जीवनोपयोगी सामान मिलते हैं | छोटे पर घने इस बाजार में अलग-अलग सामग्रियों की दुकानों का अलग अलग कतार है |

niraj kumar
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