दोस्तों आदर्श व्यापार वह होता है जिसमें कम लागत में ज्यादा मुनाफा हो साथ हीं उत्पादित वस्तु के मार्केटिंग में कोई मुश्किल न हो, और आज मैं जिस उधोग की जानकारी देने जा रहा हूँ वो इन सारी शर्तों को बखूबी पूरा करती हैं | जी हाँ मैं बात कर रहा हूँ bee Farming यानि मधुमक्खी पालन की | मधुमक्खी पालन एक ऐसा ही व्यवसाय है जो सम्पूर्ण मानव जाती को लाभान्वित कर रहा है यह एक कम खर्चीला घरेलु उद्योग है बाजार में शहद और इसके उत्पादों की बढ़ती मांग के कारण मधुमक्खी पालन अब एक सफल व्यवसाय बन गया है | यह एक ऐसा रोजगार है जिसे कम पूंजी से भी शुरू किया जा सकता है साथ हीं समाज के हर वर्ग के लोग अपना कर लाभान्वित हो सकते है, बस जरुरत है सही मार्ग दर्शन, सही प्रशिक्षण की | तो आइये इनसे मधुमक्खी पालन के विषय में जितना संभव हो सके जानने की कोशिश करते हैं ताकि आप भी लाभ ले सकें |

अपने नाना जी की विरासत को जन-जन तक पंहुचा  करुणेश जी

पटना से लगभग २५ किलोमीटर की दुरी पर स्थित बिहटा के नजदीक पैनाठी पंचायत के अंतर्गत  मुस्तफापुर गांव में  एक ऐसे परिवार हैं जो पिछले दस वर्षों से सफलता पूर्वक मधुमक्खी पालन कर शहद का उत्पादन कर रहे हैं | और आपको जानकर आश्चर्य होगा कि बिहार में मधुमक्खी पालन की शुरुआत करने वाले भी इसी परिवार के थे | आज करुणेश कुमार सिंह जी अपने नाना जी की विरासत को तो आगे बढ़ा हीं रहे हैं साथ हीं इसे जन-जन तक इसे पहुंचा भी रहे हैं |

पूरा परिवार मिल कर करता है मधुमक्खी पालन

करुणेश कुमार सिंह जी इस काम को पिछले पच्चीस वर्षों से तो कर हीं रहे हैं साथ में इनकी धर्म पत्नी एवं दोनों बच्चे भी इनका भरपूर साथ देते हैं | इसी लिए करुणेश जी शहद का उत्पादन से लेकर बिक्री तक खुद हीं कर लेते हैं   इसके अलावा करुणेश जी लोगों को इस व्यवसाय की सही प्रशिक्षण एवं बारीकियां भी भी सिखाते हैं | अब तक करुणेश जी द्वारा हजारों लोग निःशुल्क प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके हैं जिनमे से आज 300 लोग सफलता पूर्वक इस व्यवसाय को कर रहे हैं |

एक बक्से से प्राप्त होती है 50-60 किलो शहद

करुणेश जी ने बताया की इटालियन मधुमक्खी से इंडियन मधुमक्खी के मुकाबले शहद का उत्पादन ज्यादा होता है |  इटालियन मधुमक्खी के एक बक्से से जहां वर्ष में 50-60 किलो शहद प्राप्त होता है वहीं इंडियन मधुमक्खी के एक बक्से से 25-30 किलो शहद हीं प्राप्त हो पाता है | और गुणवत्ता के कोई खास फर्क भी नहीं होता | करुणेश जी खुद पैकिंग भी करते हैं जो 25gm,50gm,100gm, 250gm, 500gm एवं 1kg के बोतल में लोगों के लिए शहद उपलब्ध कराते हैं जिसके मूल्य क्रमशः 20, 30, 40, 85, 170, एवं 320 हैं ये कीमत  किसी भी ब्रांडेड कंपनियों के शहद से काफी कम है, साथ हीं करुणेश जी शहद की शुद्धता की पूर्ण गारंटी देते हैं |

शहद का जम जाना इसका प्राकृतिक गुण है

अक्सर हम शहद ले कर आते हैं तो वो कुछ दिन के बाद बोतल में हीं जम जाता है, और हम लोग समझते हैं कि ये नकली है ! जब इस विषय पर करुणेश जी से बात किया गया तो बोले कि जो शहद बसंत ऋतू से पहले निकला जाता है या फिर 80% सील होने से पहले उसे निकाला जाता है तो ऐसी परिस्थिति में प्राप्त शहद कुछ दिनों के बाद जम जाता है, पर उसके गुणवत्ता में कोई कमी नहीं आती | अगर आपको लगता है कि शहद नकली है तो आप बहुत आसान तरीके से उसकी पहचान कर सकते हैं |

असली और नकली की पहचान

आप एक प्लेट ले लें उसे साफ़ पानी से आधा भर ले अब इसमें एक चम्मच शहद डाले, प्लेट को अपनी हथेली पर ले कर धीरे-धीरे घुमाएं लगभग एक मिनट के बाद प्लेट के तल में छत्ते की आकृति बन जाएगी तो समझिये शहद 100% असली है वरना नकली है क्योकि असली शहद पानी में नहीं घुलता

niraj kumar
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