अगर चर्चा  बिहार में बाढ़ कि स्थिति की किया जाय तो उत्तरी बिहार को बिहार में बाढ़ की राजधानी कही जाएगी ! और वर्ष 2020 में तो उत्तरी बिहार दोहरा मार झेल रहा है | कोरोना के कहर से तो पहले से त्रस्त था हीं बाढ़ ने बची-खुची कसर भी निकाल दी | तो चलिए आज चर्चा करते हैं बिहार में बाढ़ से प्रभावित जगहों की और बताते हैं ग्राउंड जीरो रिपोर्ट

बिहार में बाढ़ ने 550000 से अधिक लोगों को प्रभावित किया

इस बार कोसी बसुआ में खतरे के निशान से 43 सेमी ऊपर है तो बालतारा में इसका जलस्तर 60 सेमी ऊपर है। महानंदा नदी ढेगराघाट में 105 सेमी तो पूर्णिया में 52 सेमी ऊपर बह रही है। राज्य में सोमवार को लगभग एक दर्जन स्थानों पर 50 मिमी से अधिक वर्षा हुई,5 वहीं गंगा सोमवार को इलाहाबाद से भागलपुर तक सभी जगहों पर चढ़ी है। लेकिन पटना में अब भी यह लाल निशान से काफी नीचे बह रही है। कई दिनों से लगातार वर्षा होने के बाद भी गांगा ने राज्य की नदियों के चढ़ने की रफ्तार थाम रखी है। इसके बावजूद राज्य की चार प्रमुख नदियां अब भी लाल निशान से ऊपर बह रही हैं।नदी में पानी थोड़ा भी बढ़ता है, तो सैकड़ों लोग बेघर हो जाएंगे, इस बार बाढ़ के दौरान खोज एवं बचाव काम में और ड्रोन का उपयोग किया जाएगा। आपदा के समय खोज एवं बचाव कार्य के दौरान होने वाली परेशानियों को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है। ड्रोन के उपयोग का मकसद है कि दूर-दराज में फंसे लोगों को भी अविलंब बचाया जा सके

उत्तर बिहार में बाढ़ ने तबाही मचाई है

उत्तर बिहार के विभिन्न जिलों में नेपाल से आने वाली नदियों ने बाढ़ की तबाही मचा रखी है,बावजूद इसके अधिकतर जिलों में प्रशासनिक अधिकारी यह मानने को तैयार नहीं हैं कि बाढ़ है। पश्चिम चंपारण के जिला आपदा प्रभारी अनिल कुमार राय ने बयाया कि दियारा के कुछ निचले इलाकों तथा खेतों में एक -दो दिन पहले तक थोड़ा-बहुत पानी पहुंचा था जो अब निकल रहा है, बाकी जगहों पर स्थिति सामान्य है। जिले में एनडीआरएफ की 32 सदस्यीय टीम तैनात है। जबकि वाल्मीकिनगर, ठकराहां, भितहां, बैरिया व नौतन के दो दर्जन से अधिक गांवों में बाढ़ का पानी प्रवेश कर चुका है। मझौलिया के तिरुवाह क्षेत्र में बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है। बगहा शहर के निकट एनएच 727 पर भी गंडक नदी का दबाव है।

मधुबनी, मोतिहारी और मुजफ्फरपुर में बांध टूटे, 60 से अधिक गांवों में बाढ़

मधुबनी में  एनएच-104 पर कई जगह बाढ़ का पानी चढ़ गया है। इस कारण जिला मुख्यालय से मधवापुर प्रखंड का संपर्क टूट गया है। अब मधवापुर के लोगों को मधुबनी जाने के लिए सीतामढ़ी के चोरौत होते हुए सफर करना पड़ रहा है। तराई क्षेत्रों में रुक-रुक कर हो रही बारिश से उफनाईं नदियां उत्तर बिहार के जिलों में मंगलवार से ही तबाही मचा रहीं है । बागमती, लखनदेई, गंडक के अलावा कई छोटी नदियां भी अलग-अलग जगहों पर लाल निशान से ऊपर पहुंच खतरनाक रुख अख्तियार कर चुकी है। चंपारण, तिरहुत और मिथिलांचल के लगभग पांच दर्जन से अधिक गांव या तो टापू बने हैं, या फिर उनमें पानी तेजी से फैल रहा है। इसबीच बांध और तटबंध टूटने का सिलसिला जारी है। मधुबनीके मधवापुर में बलवा अस्पताल के पास धौस नदी का बांध टूट गया। वहीं पूर्वी चंपारण के चिरैया में सिकरहना का बांध टूटने से पानी निचले इलाके में तेजी से फैल रहा है।  मुजफ्फरपुर के पारू में रिंग बांध टूटने से अफरातफरी मच गई।

दरभंगा के कुशेश्वरस्थान के बिगड़े हालात, 50 हजार लोग बाढ़ के पानी में घिरे

डीएम डॉ. त्यागराजन एसएम ने कहा कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में अधिकारी लगातार दौरा कर रहे हैं। सभी तटबंधों की निगरानी की जा रही है।  दरभंगा के कुशेश्वरस्थान पूर्वी प्रखंड के दो दर्जन से अधिक गांव पानी से घिर गए हैं। इन गांवों की करीब 50 हजार की आबादी बाढ़ से प्रभावित है। ग्रामीण घर छोड़ कमला बलान तटबंध पर शरण लेने लगे हैं। गौड़ाबौराम प्रखंड के चतरा गांव के 50 घरों में चार से पांच फीट पानी जमा हो गया है। उधर, घनश्यामपुर प्रखंड के डूब क्षेत्रों की हालत भी गंभीर बनी हुई है। हायाघाट में इनमाइत ढाला के पास हायाघाट-अकराहा पथ के ऊपर से बहने लगा है जिससे हायाघाट का इस रास्ते से सड़क संपर्क भंग हो गया है। रास्ते पर दो से ढाई फुट पानी बह रहा है।

दरभंगा में गेहुंआ के पानी से फसलों को नुकसान

दरभंगा से होकर बहने वाली कुछेक नदियां के निशान से ऊपर हैं, केंद्रीय जल आयोग के अनुसार कमला बलान का जलस्तर जयनगर में खतरे के निशान से 20 सेमी ऊपर है, इसके जलस्तर के और बढ़ने की संभावना है। गेहुआं नदी में पानी बढ़ने से किरतपुर प्रखंड के कई गांवों में पानी प्रवेश कर गया है। इससे बड़े पैमाने पर फसलों का नुकसान हुआ है।

 

मुजफ्फरपुर के छह  प्रखंड बाढ़ की चपेट में, ढाई हजार ग्रामीणों के घर में पानी

बागमती ने मुजफ्फरपुर में , लखनदेई व मनुषमारा व गंडक के उफनाने से जिले के छह प्रखंड बाढ़ की चपेट में आ गये हैं। गंडक के जलस्तर में वृद्धि से साहेबगंज, पारू व सरैया प्रखंड में बांध के अंदर बसे डेढ़ दर्जन गांव बाढ़ की चपेट में आ गये हैं। पारू में सुबह रिंग बांध टूटने से अफरातफरी मच गई। ग्रामीणों ने तीन घंटे की मशक्कत के बाद टूटे बांध से गांवों में पानी के बहाव को रोका। मगर अभी खतरा बना हुआ है। बागमती औराई, कटरा व गायघाट में तबाही मचा रही है। तीनों प्रखंड में करीब ढाई हजार घरों में पानी घुसा हुआ है। दर्जनभर मुख्य सड़कों पर दो से तीन फीट पानी बह रहा है। लखनदेई व मनुषमारा का पानी भी औराई व कटरा के इलाके में फैल रहा है। बागमती के जलस्तर में हल्की कमी के बावजूद बाढ़ प्रभावित गांवों की स्थिति नहीं सुधरी है। इधर, कांटी प्रखंड के मिठनसराय इलाके में बाढ़ का पानी पहुंच गया है। खेतों अचानक बढ़े पानी से निचले इलाके में बसे लोग मुजफ्फरपुर-दरभंगा एनएच 57 पर शरण लेने के लिए बांस-बल्ला लगा दिया है।

 

गोपालगंज के बारह गांव भी बाढ़ की चपेट में

वाल्मीकिनगर बराज से लगातार पानी छोड़े जाने से स्थिति गंभीर होती जा रही है, बाढ़ का पानी गोपालगंज सदर व बैकुंठपुर के बारह गांवों में घुस गया है। गंडक खतरे के निशान से पतहरा में 35, डुमरिया घाट में 15 व मटियारी में 10 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है। सदर प्रखंड के जगीरी टोला, खाप मकसूदपुर, रामनगर, मलाही टोला, केरवनिया टोला, मंझरिया, टोला कीनूराम, पकड़िया व बैकुंठपुर के पकहा,शीतलपुर,महरानी व खोम्हारीपुर गांवों के खेत-खलिहानों में बाढ़ का पानी प्रवेश कर जाने से ग्रामीणों में हाय तौबा मची हुई है।

 

फूड पैकेट अधिकतम 10 किलो का होगा

बाढ़ के दौरान दूरदराज वाले क्षेत्रों में भारतीय वायुसेना के हेलीकॉप्टर के माध्यम से राहत सामग्री या फूड पैकेट की एयर ड्रॉपिंग करवाई जाती है। इस बार आपदा प्रबंधन ने तय किया है कि यह फूड पैकेट अधिकतम 10 किलो का होगा ताकि इसके नुकसान होने का खतरा कम हो। जिलों को कहा गया है कि वे ऐसे क्षेत्रों की पहचान कर वहां के वृद्धजन, दिव्यांग, बच्चे, गर्भवती व धातृ महिलाओं की पहचान कर लें ताकि बाढ़ आने की स्थिति में उन्हें प्राथमिकता के आधार पर सुरक्षित बाहर निकाला जा सके।

 

सभी को मास्क की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित

सरकार की ओर से मास्क वितरण योजना पर विभाग ने कहा है कि संबंधित ग्राम पंचायत यह सुनिश्चित करें कि सभी परिवारजनों को मास्क की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित हो ताकि कोरोना का फैलाव रोका जा सके। लोगों को सुरक्षित स्थानों तक लाने के दौरान सोशल डिस्टेंसिंग सहित अन्य नियमों का पालन करने को कहा गया है। इस बार कोरोना के कारण नावों या मोटर वोटों को भी आवश्यकता के अनुसार सेनेटाइज किया जाएगा ताकि कोरोना संक्रमण का फैलाव नही हो।

 

niraj kumar
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