पटना के दीघा घाट के दुधिया मालदा आम न केवल भारत में, बल्कि कई देशों में  भी प्रसिद्ध हैं। यहां से आमों को अमेरिका, यूरोप, दुबई, स्वीडन, इंग्लैंड और कई अन्य देशों में निर्यात किया जाता है मालदा आम, जिसे बिहार में “किंग ऑफ़  मैंगो” के रूप से जाना जाता है, दीघा अपने आम के बाग़ों  के लिए प्रसिद्ध है और यही नहीं दीघा  का आम बिहार राज्य के बाहर भी बेहद्द लोकप्रिय है। 

गुलाब-लाल गुलाब खस या सिंधुरा से लेकर तोता की चोंच के आकार वाले तोतापुरी तक, आम की अनोखी किस्में भारतीय बाजारों पर राज करती हैं और बिहार का  मालदा  जो कि एक अनोखी सुगंध  से भरा होता है।

मालदा की पहचान कैसे करें

मालदा  विशेष सुगंध, मीठे रस और पतले गुठली  के लिए जाना जाता है जिसमें कोई जटिल फाइबर नहीं होता है

यह अन्य प्रकार आमों की तुलना में कम छिलके का होता है और इसमें एक मीठा सुगंध होता है, यह स्वाद में मीठा-खट्टा होता है और गूदेदार और स्वादिष्ट होता है।

इसके अलावा, प्रसिद्ध मैंगो किस्म गुलाब खस, दीघा मालदा या जरदालु, बिहार से आम की कई रसीली किस्में मिलते है, इस रसदार फल, जिसे ‘किंग’ कहा जाता है, भारत में इसकी लगभग  1500  किस्में हैं। प्रत्येक किस्म का एक अलग स्वाद, आकार और रंग होता है।

किस मौसम में यह पाया जाता है

भारत में अप्रैल से अगस्त तक बाजारों में आम की अद्भुत किस्मों का दावा किया जाता है। गर्मी का मौसम स्वादिष्ट आमों के स्वाद का लुत्प उठाया जा सकता है।

गर्मी का मौसम आते ही हम इन रसदार आम  से सजी मंडियों को देखते हैं, जिसको मना कर पाना मुश्किल है।

पूरे साल हम उनकी प्रतीक्षा करते हैं और वे निस्संदेह हमारे पसंदीदा फल हैं

जबकि हम में से अधिकांश लोग इस स्वादिष्ट फल को खाना पसंद करते हैं, यहां तक की डाइबिटीज़ के लोगों को सलाह दी जाती है कि वे अपनी चीनी और कैलोरी सामग्री के कारण उनसे बचें, लेकिन वर्जित चीजों के बाद जाना मानव स्वभाव है।

जितना अधिक आप आम  से बचने के लिए कहा जाएगा, उतना ही अधिक आप उन्हें खाने के लिए ज़िद करेंगे।

अपनी पतली त्वचा, छोटे बीज, कम रेशे, दूधिया पीली लुगदी और एक अनोखी मीठी सुगंध के साथ, दुधिया मालदा को लोगो द्वारा सबसे अच्छा माना जाता है।

विलुप्त होने के कगार पर दीघा का दूधिया मालदह

विभिन्न प्रकार के आमों में से एक, बिहार का ‘दुधिया मालदा’ 1,000 से कम पेड़ों में विलुप्त होने के कगार पर है। बरसों पहले पाकिस्तान से लाई गई आम की इस अनोखी प्रजाति को दूध से सींचा गया था इसलिए नाम पड़ा दुधिया मालदह, पर अब विकास की बलि वेदी पर कुर्बान हो रहे इस किस्म की अब केवल झलकियां की मिल पाती है | खास कर दीघा में अब दूधिया मालदह के पेड़ गिनती के बच गए हैं और वो भी अब बूढ़े हो चले हैं | इन पेड़ों के बाद तो इतिहास हीं बन जायेगा विश्व प्रसिद्ध दूधिया मालदह