ये कहना गलत नहीं होगा कि बिहार वो ऐतिहासिक राज्य है जहां से भारत ने शुरू की थी अपनी आधुनिक यात्रा  | बिहार पर्यटन प्राचीन सभ्यता, धर्म, इतिहास और संस्कृति का अनमोल मेल है, जो भारत की पहचान है।यह राज्य भारत के कुछ महान साम्राज्यों जैसे मौर्य और गुप्त के उदय और उनके पतन का गवाह भी रहा है। वैसे तो बिहार में घुमने के लिए कई प्रसिद्ध जगह हैं लेकिन हम आपको यहां के कुछ प्रमुख ऐतिहासिक जगहों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिनके बारे में आपने सुना तो जरूर होगा लेकिन इनकी विशेषताओं के बारे में नहीं जानते होंगे।

मनेर शरीफ

बिहार का मनेर शरीफ ऐतिहासिक अतीत के अवशेषों से भरा है। राजधानी पटना से 18 किलोमीटर और दानापुर से कुछ ही दूरी पर स्थित है यह ऐतिहासिक मकबरा |  प्राचीन समय में मनेर शरीफ इस क्षेत्र में शिक्षा और ज्ञान का प्रमुख केन्द्र था, मनेर शरीफ में दो बहुत प्रसिद्ध मुस्लिम मकबरे हैं | एक शाह दौलत का, जिसे छोटी दरगाह भी कहते हैं |  दूसरा मकबरा शेख याहिया मनेरी का है, जिसे बड़ी दरगाह कहते हैं |  मनेर शरीफ में आपको जहांगीर के समय की वास्तुकला की विशेषताएं भी मिलेंगीं |

राजगीर

पटना से 100 किमी दक्षिण-पूर्व में पहाड़ियों और घने जंगलों के बीच बसा खूबसूरत राजगीर न केवल एक प्रसिद्ध धार्मिक तीर्थस्थल है बल्कि एक सुन्दर हेल्थ रेसॉर्ट के रूप में भी लोकप्रिय है। यहां हिन्दु, जैन और बौद्ध तीनों धर्मों के धार्मिक स्थल हैं।नालंदा के पास स्थित राजगीर, मंदिरों और मठों से भरी जगह है। यह एक घाटी में बसी जगह है और इसके आसपास के स्थान बहुत सुंदर हैं। आसपास के जंगल राजगीर की सुंदरता को और बढ़ाते हैं। यह क्षेत्र भगवान बु़द्ध और बौद्ध धर्म से लंबे समय तक संबंधित रहा है। भगवन बुद्ध ने अपने जीवन का लंबा समय यहां बिताया था |

पावापुरी

पावापुरी, जिसे पावा भी कहा जाता है, भारत के बिहार राज्य के नालंदा ज़िले में राजगीर और बोधगया के समीप स्थित एक शहर है। यह जैन धर्म के मतावलंबियो के लिये एक अत्यंत पवित्र शहर है ऐसा इसलिए कि माना जाता है कि भगवान महावीर को यहीं मोक्ष की प्राप्ति हुई थी | जैन धर्म के लोगों के लिए पावापुरी एक पवित्र स्थान है। यह राजगीर से कुछ ही दूरी पर स्थित है। पावापुरी में हीं भगवान महावीर का अंतिम संस्कार हुआ था। पावापुरी घूमने का सबसे अच्छा समय अक्टूबर से मार्च तक है। यहां पर घूमने लायक जगहें हैं : जलमंदिर और समोशरण

वाल्मीकि नगर

बिहार के पश्चिमी चंपारण का एक छोटा सा गांव है। यह भारत नेपाल सीमा पर स्थित है। इस जगह को वाल्मीकि आश्रम के लिए भी जाना जाता है। माना जाता है कि रामायण के रचयिता महर्षि वाल्‍मीकि ने इसी आश्रम में अपना कुछ समय व्‍यतीत किया था। उनके नाम पर ही इस जगह का नाम भी वाल्‍मीकि नगर पड़ा था। वाल्मीकि नगर में रामायण के रचियता महर्षि वाल्मीकि के नाम पर वाल्मीकि आश्रम स्थित है। वाल्मीकि का नाम पहले रत्नाकर था, जो लोगों से सामान छीनकर अपना जीवन यापन करते थे। बाद में उन्हें पछतावा हुआ और उन्होंने प्रायश्चित करने का फैसला किया। वाल्मीकि नगर में मकर संक्रांति के समय में यहां हर साल त्यौहार आयोजित किया जाता है। गंडक नदी वाल्मीकि नगर की सुंदरता में चार चांद लगाती है।

Niraj Kumar