fish farming in bihar

अपार संभावनाओं से परिपूर्ण रहते हुए भी आज बिहार में काफी बेरोजगारी है और इसकी सबसे बड़ी वजह लोगों का स्वरोजगार को छोड़ नौकरी की तरफ अंधाधुन भागना है | बिहार में स्वरोजगार  कि कितनी सम्भावना है इसका सबसे सटीक उदाहरण मछली पालन है | आज बिहार में मछली ( Fish Farming in Bihar ) की जो दैनिक खपत होती है उसका अस्सी प्रतिशत हिस्सेदारी बिहार में बाहर से आने वाली मछलियों का है, तो सोंच कर देखिये कितना बड़ा अवसर आपके बिहार में है |  

पारम्परिक खेती से सौ गुणा अधिक आमदनी

बिहार में मछली की जितनी डिमांड है, जिसे अकेले बिहार पूरा नहीं कर सकता तभी तो आंधप्रदेश राज्य की बिहार में रोजाना चांदी कटती है | हमारे बिहार के किसान भाई केवल पारम्परिक खेती पर हीं निर्भर रहते हैं, पर शायद ये बात उनके समझ में नहीं आती की अगर वे अपने खेत में तालाब खुदवा कर मछली पालन का कार्य करें तो  उनकी आमदनी सौ गुणा तक बढ़ सकती है बशर्ते सही तरीके से करें |बिहार में मछली पालन (   Fish farming in Bihar ) करना बहुत जरूरी है

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माल अपना रेट भी अपना

किसान भाई अपने खेत में अनाज उगाते हैं जब फसल पक जाती है और खेत से घर पर आ जाती है तब शुरू होता है इसे बेचने की माथा-पच्ची ! सारा मेहनत और पैसा किसान का और उसका रेट निर्धारित करेंगे व्यापारी, लेकिन मछली में ये बात नहीं है आप बस इसे पालने का सोंचिये, तैयार मछली को बेचने का कोई टेंशन नहीं है एक ग्राहक को बुलाएँगे दस आएगा वो भी आपके रेट पर वो भी नगद

बिहार में मछली पालन

बिहार में मछली पालन करने के लिए सरकार की तरफ से पचास प्रतिशत तक का अनुदान

आज बिहार के कई इलाकों में मछली पालन को प्रोत्साहित करने के लिए बिहार सरकार की ओर से प्रोत्साहन दिया जा रहा है | अब आपको तालाब के निर्माण में होने वाले खर्च में भी सरकार की तरफ से  50 प्रतिशत अनुदान भी दिया जा रहा है इसके लिए योजना तथा लागत को देखा जायेगा लेकिन सभी योजना पर 50 प्रतिशत की सब्सिडी दिया जा रहा है जी लगभग 50 हजार से 20 लाख रुपये तक की सब्सिडी दिया जा रहा है | साथ हीं किसान भाइयों को विशेषज्ञों द्वारा निःशुल्क प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है ताकि सही तरीके से इस कार्य को किसान भाई कर सके