वैसे तो इंसान दूध और मांस के लिए बकरी का पालन सैकड़ो वर्षों से कर रहा है | और आज भी किसी भी गांव में आप चले जाएं आपको लगभग हर कृषक के पास दो चार बकरियां मिल जाएगी और उन बकरियों से उन्हें काफी हद तक आर्थिक सहायता मिल जाती है ये बकरियां उनके लिए चलते-फिरते एटीएम मशीन होती है | यही कारण है की अब बकरियों के फार्मिंग की शुरुवात हो गई है और आज बहुत से ऐसे लोग हैं जिन्होंने बकरी पालन में अपना कॅरियर ढूंढा और वे आज सफल हैं |

Goat Farming के लीजेंड हैं उमेश सर

अगर बात बकरी पालन की हो तो पटना से 20 किलोमीटर की दुरी पर स्थित फतुहा से सटे सोनरू गांव के उमेश कुमार कुशवाहा सर का नाम आना लाजमी है | उमेश सर बिहार में बकरी पालन के महारथी माने जाते हैं |

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बकरी पालन का जानिए पूरा सच, बिजनेस गुरु उमेश जी बता रहे है Goat Farming Business की बारीकियाँ

आज बकरी पालन में उमेश सर ने जो मुकाम हासिल किये हैं वो अपने बल बुते किये हैं उन्हें किसी ने हांथ धर कर सिखाया नहीं है, पर उमेश सर आज के उन युवाओं को जो वास्तव में बकरी पालन करना चाहते हैं उनकी हर संभव मदद करते हैं

फ्री के ज्ञान का वैल्यू नहीं देते हैं लोग

शुरू में उमेश सर लोगों को निःशुल्क ट्रेनिंग देते थे, पर जब उन्होंने हजारों लोगों को निःशुल्क प्रशिक्षण दिया और उनमे से किसी ने भी बकरी का पालन शुरू नहीं किया तब इन्होने इसे बंद कर दिया और फिर शुरू किये पेड ट्रेनिंग | और आज स्थिति ये है की लोग पांच-पांच हजार ले कर कतार में खड़े रहते है उमेश सर से ट्रेनिंग लेने के लिए और आज इनके ट्रेंड किये हुए सैकड़ो लोग बकरी का सफलता पूर्वक पालन कर लाखों रूपए कमा रहे हैं

ऑफ लाइन और ऑन लाइन दोनों तरह से देते हैं ट्रेनिंग

वैसे तो आठ दिनों तक चलने वाले इस ट्रेनिंग को उमेश सर अपने आवास पर देते हैं लेकिन राज्य में लॉक डाउन जारी हो जाने के बाद तथा दूसरे राज्य के लोगों के लिए ऑन लाइन ट्रेनिंग भी देते हैं जिसकी फ़ीस ऑफ लाइन ट्रेनिंग से थोड़ी कम होती हैं |

बारीकी से सिखाते हैं लोगों को

ट्रेनिंग में लोगों को बकरी के विषय में प्रजाति के विषय में खान-पान के विषय में बहुत बारीकी से एवं सरल भाषा में सिखाते हैं ताकि लोग इसमें सफल हो जाए | आज इनके द्वारा ट्रेंड किये लोग झारखण्ड, उत्तरप्रदेश ओडिशा बंगाल जैसे राज्य में कामयाबी की बुलंदियों को छू रहे हैं

बिहार में अपार संभावनाएं हैं बकरी पालन की

उमेश सर का कहना है की आज जो बिहारी युवा चंद हजार के लिए अपने घर से हजारो किलोमीटर दूर जीविकोपार्जन के लिए जाते हैं अगर वे लोग तबियत से अपने घर पर बकरी का पालन करे तो उन्हें बाहर जाने की जरुरत ही नहीं है आज बकरी के उत्पादन में भारत में राजस्थान पहले स्थान पर है एवं उत्तरप्रदेश दूसरे स्थान पर पर बिहार का दूर-दूर तक कोई नामोनिशान नहीं है | अगर दूसरे राज्य जाकर कमाने वाले बिहारी बंधू अपने घर पर हीं रह कर इस बेहतर स्वरोजगार को अपनाये तो स्थिति काफी सुधर सकती है |