गरीबी बहुत कुछ सीखा देती है बशर्ते आप सीखना चाहे तो, कुछ ऐसी हीं कहानी है बिहार मुजफ्फरपुर (Bihar Muzaffarpur ) के तीन भाइयों की जिन्होंने अपने दृढ इच्छा शक्ति से गरीबी को दूर भगाया और आज बतख पालन (Duck Farming ) से डेढ़ लाख प्रति महीने कमा रहे हैं वो भी अपने गांव में रह कर |

तीन सगे भाई महागरीबी को हराकर कर रहे हैं बतख पालन ! कमाते हैं डेढ़ लाख महीना

पिता की बीमारी के कारण बिक गए थे जमीन

पहले एक्सीडेंट और फिर बीमारी की वजह से घर की आर्थिक स्थिति को तोड़ कर रख दिया था | नौबत जमीन बेचने तक भी आई और बिकी भी आप इन तीनों भाई के सामने सबसे बड़ी समस्या थी की इतनी कम उम्र की किया क्या जाये तब उन्होंने बतख पालन (Duck Farming ) करने की सोंची जिसकी प्रेरणा उन्हें अपने बगल के गांव से मिली थी |

यहां भी किस्मत बेईमाई निकली

किसी तरह पैसे जुटा कर बतख के चूजे (Ducklings ) तो खरीद लिए पर इनलोगों के लिए ये अनुभव बिलकुल नया था और कोई बताने वाला भी नहीं था फिर भी जैसे-जैसे इन्होने बतख पालन (Duck Farming ) की शुरुआत कर डाली | पर आपको बता दें की बतख पालन (Duck Farming ) का सबसे अहम हिस्सा होता है ब्रूडिंग की (Duck Brooding ) प्रक्रिया और इस दौरान अगर तापमान और खान-पान सही नहीं मिले तो बतख के चूजे की (Ducklings )  मृत्यु हो जाती है, और यही इनके साथ भी हुआ बच्चे मरने लगे | अब जहां से चूजे लिए थे वो लोग भी फोन नहीं उठा रहे थे | बावजूद इसके इन तीनों भाइयों ने हार नहीं मानी और किसी तरह चूजे के मृत्यु पर कंट्रोल किया |

बतख ( DUCK )पालन में EGG MARKETING और चूजे से लेकर सारे SECRETS खोल कर रख दिया इस 20 साल के लड़के ने

जानकारी के आभाव में अंडे बेचने में आई दिक्क्त

बतख (Duck ) जब पांच महीने के हुए तो अंडे देने शुरू कर दिए, अब सबसे भारी दिक्क्त आई इनको अंडे बेचने में | मजबूरन इनको महज पांच रूपए प्रति अंडे का रेट मिला वो भी बिचौलिए की मदद से | भले इसमें उन्हें मुनाफा कम होता था पर अब घर की स्थिति पहले जैसी नहीं थी | और लगभग दो वर्षों तक तीनों भाइयों ने पांच रूपए की दर से अंडे बेचे |

फिर किया अपने फार्म का विस्तार

कम हीं सही पर पैसे आने से हिम्मत बढ़ा फिर तीनों ने अपने बतख फार्म ( Duck Farm ) का विस्तार किया अब उनका फार्म  ( Farm )दो हजार बतखों (Duck) का था | और कहा जाता है की पहला कदम बढ़ाने से हीं नए रास्ते भी मिलते हैं कुछ ऐसा हीं इनके साथ भी हुआ | इन तीनों भाइयों ने सोंचा की हम लोग पांच रूपए अंडे बेचते हैं तो क्यों न हम लोग अपने अंडे को हैचरी डाल दें ताकि हम लोग भी चूजे बेच सके, तब उन्होंने अंडे मुजफ्फरपुर के एक हैचरी में दो रूपए प्रति अंडे किराया पर डलवाने शुरू कर  दिए  जिससे उन्हें अपने उत्पाद का दस गुना लाभ मिलने लगा

आज करते हैं लोगों की मदद

बतख पालन  ( Duck Farming ) में जो परेशानी इन्हे उठानी पड़ी ये लोग नहीं चाहते हैं की इस फिल्ड में किसी दूसरे को भी इन सब परेशानियों का सामना करना पड़े इसलिए जो भी नए बतख पालक (Duck Farmar ) हैं उन्हें ये लोग हर संभव मदद करते हैं |