danapur ka kala jamun काला जामुनखाना कितना भी लाजवाब हो अगर लास्ट में मीठा न मिले तो अधुरा ही लगता है. वैसे ही अगर शादी-ब्याह में गुलाब जामुन के साथ आइसक्रीम हो तो मजा आ जाता है. ऐसे में अगर कोई पटना के साधू होटल का काला जामुन परोस दे तो क्या ही कहना है.

काला जामुन, ये मिठाई गुलाब जामुन का मॉडिफाइड रूप है. दानापुर कैंट स्थित ऑटो स्टैंड से कुछ मीटर दूर स्थित साधू स्वीट्स अपनी इस ख़ास पेशकश के लिए पटना छोड़िये, देश और विदेश में भी बहुत फेमस है. अंग्रेजों के ज़माने से चल रही इस दूकान के दीवानों की लिस्ट में यहाँ तक कि कई विदेशी पत्रकार भी शामिल हैं.

कैसे बना काला-जामुन

साल 1936 में साधू शरण राय ने आजीविका चलाने के लिए पान की दूकान की शुरुआत की थी. मृदुभाषी शरण राय ने अंग्रेजों के आग्रह पर चाय भी रखने लगें. साल-दर-साल दुकान पर सामान बढ़ने लगा और दुकान का नाम पड़ गया साधू स्वीट्स. ख्याति तो बस इससे जोड़ लीजिए कि आज व्यापार की बाग़-डोर तीसरी पीढ़ी संभाल रही है.साधू स्वीट्स पर बलुशाही, मलाई चाप, बड़ा गुलाब जामुन और अन्य मिठाइयों के साथ ही चाट और समोसा भी मिलता है. यहाँ तक कि शुद्ध मक्खन और घी के लिए भी ये सही जगह है. पर इतनी वैरायटी होने के बावजूद साधू स्वीट्स आने वाले लोगों की पहली पसंद काला जामुन ही है.

दूकान पर मौजूद संजय कुमार जी बताते हैं कि विक्रम (पालीगंज) से एक कारीगर आया था. उसने ही काला जामुन के विचार को आकार प्रदान किया. तब से लेकर अब तक काला जामुन बनाया, खाया और खिलाया जा रहा है.

आज बिकने वाला यह मिठाईं बथेरी, लोधीपुर के रहने वाले कारीगर द्वारा बनाया जाता है. 1953 से साधू स्वीट्स से जुड़े ये कारीगर अब तक अपने हाथों के जादू से सबको मोह लेने में कामयाब हैं.

काला जामुन का स्वाद हमें कैसा लगा

साधू स्वीट्स पहुँचने पर सबसे पहले काउंटर पर मौजूद दूकान मालिक राजीव राय ने हमारा स्वागत किया. काला-जामुन और दूकान के इतिहास के बारे में जानने के बाद हम ने सोचा की कस्टमर्स से ही बात कर ले. ऐसे में काला जामुन का स्वाद ले रहें आदिल ने बताया- “ साल 2001 से खा रहें हैं. यहाँ के जैसा स्वाद कहीं नहीं है. इसलिए पटना से हफ्ता में दो बार तो आ ही जाते हैं. “

साधू स्वीट्स के मालिक संजय राय और विशाल राय

बगल में ही बैठें विशाल कहते हैं, “ ऐसा काला-जामुन कहीं नहीं खाया. 15 साल से हर एक दिन बीच कर के पटना से आता हूँ खाने और आगे भी आने का पूरा मन है.”

इतनी तारीफ सुनने के बाद हमने भी अपने लिए काला जामुन मंगा लिया. रस में डूबा काला-जामुन ऊपर से एक दम क्रिस्प और अन्दर से एकदम मुलायम. मुंह में डालते ही एकदम से घुल जाता है. और स्वाद तो ऐसा कि ‘एक से मन न भरे और दूसरा खाने का मन न करे’.

बेटियों को जाता है श्रेय

दूकान के मालिकों में से एक विशाल राय दूकान की ख्याति का श्रेय दानापुर की बेटियों को देते हैं. वो कहते हैं, “ दानापुर की बेटियों की बदौलत ही हमारा स्वाद दूर-दूर तक पहुँच पाया है. चाहे अगुआ को खुश करना हो या बायना देना, यह मिठाईं जरुर जाता है. साथ ही ससुराल गयी बेटियां भी काला-जामुन का जिक्र जरुर करती हैं. वैसे भी एक बार जो खाता है दोबारा जरुर लौट कर आता है.”

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इतना सुनने के बाद आपका मन भी जरुर ललचा रहा होगा. वैसे हम तो कहेंगे देर मत ही करिए जैसे ही मौका मिले  स्वाद चख ही आइये. ज्यादा महंगा भी नहीं है, मात्र 8 रूपए प्रति पीस और समय सुबह 7:30 से रत 9:00 बजे तक.http://www.biharstory.in