विजय होटल पर मिलता है सबसे बेस्ट चुस्ता
                               विजय होटल पर मिलता है सबसे बेस्ट चुस्ता

पटना का विजय होटल अपने लाजवाब स्वाद के कारण लोगों के दिलों में घर चुका है. यहाँ मिलने वाली वैरायटी की लिस्ट इतनी लंबी है कि उंगलियां कम पड़ जाए. भारत में नॉन-वेज का चलन कब से शुरू हुआ ये कह पाना बहुत मुश्किल है. राजा-महराजा मनोरंजन के लिए शिकार पर जाया करते थें. इसके बावजूद जानकारों की मानें तो रसोई में मास पकना मुग़ल काल से शुरू हुआ. वैसे आज कई दशक के बाद भी लोग में नॉन-वेज के प्रति प्रेम बरकरार है. देश के अलग-अलग हिस्सों में लोग पुरखों के ज़माने से अलग-अलग रेसिपी खा और खिला रहे हैं. ऐसी ही कई ख़ास रेसिपी विजय होटल लोगों तक पहुंचा रहा है.

कब से शुरू हुआ विजय होटल

पटना का अंटाघाट हर वक्त लोगों से पटा रहता है. शहर के कोने-कोने से लोग यहां गंगा-पार उगाई ताज़ा सब्जी खरीदने आते हैं. वैसे इसके अलावा भी कई कारण हैं यहाँ आने के और उनमें से एक कारण है विजय होटल. साल 1982 में स्थापित विजय होटल मटन खाने वालों के लिए जन्नत है. देशी मसालों से तैयार मटन की खुशबू हर नॉन-वेज प्रेमी को मुग्ध कर देती है.

अंटाघाट, मेन रोड स्थित विजय होटल तक पहुंचने के लिए बांस के पुल से गुज़रना पड़ता है. आने वालों की संख्या इतनी ज्यादा है कि एक ही जगह पर दो होटल है, यानि कि लोग दो अलग-अलग जगह बैठ कर खा सकते हैं.

विजय होटल पर दिखता है अनुभव का रंग
विजय होटल पर दिखता है अनुभव का रंग

10 सालों से मटन बना रहे रणदीप पासवान बताते हैं, “ वहीँ सब मसाला है जो घर पर डलता है. यहाँ बस दो ही चीज़ ख़ास है एक की मटन को कोयले के चूल्हे पर तैयार किया जाता है और दूसरा की मसालों के साथ प्यार और अनुभव को मिलाया जाता है.”

क्या-क्या मिलता है

विजय होटल आने वाले लोग कम-किफ़ायत में पेट भर खाना खा सकते है. सादा खाना के साथ मटन की अलग-अलग डिश उपलब्ध है, पर यहाँ का चुस्ता विजय होटल को टॉप क्लास बनाता है. चुस्ता दरअसल बकरी के बच्चे का अमाशय होता है जिसमें पिया हुआ दूध भरा होता है.

खूब पसंद है लोगों को लार
खूब पसंद है लोगों को लार

अलग-अलग डिश का अलग-अलग दाम है. जैसे कि 120 रूपए में दो पीस मटन चावल और सलाद के साथ दिया जाता है. वहीँ 4 कलेजी और चावल का दाम है 120 रूपए, यानि की दो पीस कलेजी 50 रूपए में. 100 रूपए में एक क्वार्टर लार की प्लेट में 8 पीस होते हैं. स्टार डिश चुस्ता पीस के हिसाब से मिलता है.

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रही बात शुद्धता की तो बड़े-बड़े रेस्टोरेंट की तरह यहाँ भी लाइव कुकिंग की सुविधा उपलब्ध है. बस फिर अब तो शक और संदेह की कोई गुंजाइश ही नहीं उठती है.

क्या कहते हैं खाने वाले

होटल कभी खाली नहीं रहता है. बिना किसी प्रचार और प्रमोशन के दशकों से चल रहा विजय होटल अपने स्वाद के दम पर आगे बढ़ रहा है. ये हमारा नहीं बल्कि वहां बैठ कर खाना खा रहे लोगों का मानना है. 10 सालों से मटन का स्वाद लेने विजय होटल आ रहे पटना सिविल कोर्ट के अधिवक्ता सूर्या कहते हैं, “ जब 100 रूपए प्लेट था तब से आ रहे हैं कारण है स्वाद जिसमें अब तक कोई बदलाव नहीं आया है. भीड़ ही इतना होता है कि विजय होटल को अलग से प्रचार की कोई जरुरत नहीं है.”

खूब लगती है विजय होटल पर खाने वालों की भीड़
खूब लगती है  पर खाने वालों की भीड़

बगल में बैठे एक और ग्राहक बताते हैं कि वो यहाँ सात सालों से आ रहे हैं. कारण है साफ़ और शुद्ध खाना.

क्यों जाना चाहिए आपको

अगर आप मटन खाना पसंद करते हैं तो विजय होटल जाना तो बनता है. यहाँ मटन की जितनी वैरायटी है वो और कहीं उपलब्ध नहीं है. ऊपर से सब कुछ नज़र के सामने पक रहा है तो संदेह भी कोई नहीं रहता है. कम दाम पर बेमिसाल स्वाद अब इससे ज्यादा और क्या ही कारण ढूँढने पड़ेंगे.