सिर्फ भारत में ही नहीं बल्कि पुरे दुनिया में बतख पालन (Duck Farming) एक बहुत ही प्रचलित व्यवसाय है। इसका पालन ऐसे मांस और अंडे दोनों के लिए कर सकते हैं मगर ज्यादातर इसका पालन अंडे के लिए किया जाता है। वर्तमान में बिहार के लिए बतख पालन (Duck Farming) उभरता हुआ एक बढ़िया व्यवसाय है। आज बिहार के लगभग सभी जिलों में बतख पालन (Duck Farming) हो रहा है। कहा जाए तो सिर्फ बिहार में अभी 200 से अधिक Duck Farm है जिसे कर के लोग बढ़िया मुनाफा कमा रहे हैं। इसका पालन करना बहुत ही ज्यादा सरल है और साथ ही बहुत कम लागत में इसकी शुरुआत भी की जा सकती है। ये बहुत मजबूत पक्षी होते हैं खुद को बदलते वातावरण के साथ ढाल लेते हैं और इनमें बिमारियों का डर भी काफी कम रहता है।

मुज़्ज़फरपुर जिले के चढुआ गांव के निवासी संजीव कुमार जो की सेवानिवृत अभियंता हैं वो एक Duck Farm चला रहे हैं जिसमे वो खाकी कैम्पवेल का पालन कर रहे हैं। । इस बारे में पूछने पर वो कहते हैं की उन्हें हमेशा से प्रकृति और जानवरों से बहुत प्रेम रहा है और इसी वजह से उन्होंने Duck Farm की शुरुआत की। वो अभियंता की नौकरी से सेवानिवृत होने के बाद किसी ऐसे व्यवसाय की तलाश में थे जिससे अपने घर से संचालित कर सकें और उनके प्रकृति प्रेम ने उन्हें बतख पालन (Duck Farming) के लिए प्रोत्साहित किया।

batakh paalan..

बतख पालन (Duck Farming) से क्या क्या लाभ हैं ?

बतख पालन (Duck Farming) से कई तरह के लाभ है आमतौर पर इसे अंडे के लिए ज्यादा पाला जाता है मगर इसका पालन मांस के लिए भी किया जा सकता है।

Duck Farm की शुरुआत बहुत कम लागत में की जा सकती है ,इसके शेड के लिए भी बहुत ज्यादा खर्च की जरुरत नहीं होती।

बतख की गिनती मजबूत पक्षियों में होती हैं जिसके वजह से इनको बहुत ज्यादा रख-रखाव की जरूरत नहीं होती।

बतख की रोग प्रतिरोधक क्षमता बहुत अधिक होती है जिससे ये कम बीमार पड़ते हैं और दवाओं का खर्च भी कम ही आता है।

इनको घर के चावल,मक्का आदि चारा खिला सकते हैं इसके अलावा इन्हें और सस्ता चारा भी उपलब्ध करा सकते हैं जिससे इनके खाने का खर्च भी ज्यादा नहीं आता।

बतख मुर्गियों के मुक़ाबले ज्यादा जीते हैं और बहुत लम्बे  समय तक अंडे देते हैं।

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खाकी कैम्पवेल (Khaki campwell) नस्ल की विशेषता :

(Poultry Farming) बतख पालन के शुरुआत के लिए ये सबसे अच्छी प्रजाति होती है।

(Khaki campwell)  पहले साल में 200-300 अंडे देती हैं और  साल तक अंडे देती हैं।

3 सालों के बाद इसका उपयोग मांस के लिए होता है।

Khaki campwell शोर मचाने वाली होती हैं जिससे कोई अगर फार्म में घुसता है तो आपको पता चल जाताहै।

इसके अंडे का वजन 70 ग्राम तक होता है।

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बतख के खाने का प्रबंध :

आमतौर पर बतख साधारण तरह से खाने के उपयोग में लाये जाने वाली चीज़ों को खाते हैं इसलिए इनके खाने का इंतजाम मुर्गियों के खाने  इंतजाम की तरह कर सकते हैं। लेकिन जो बतख ज्यादा अंडे देने में सक्षम हैं उनके लिए ज्यादा पौष्टिक आहार का प्रबंध करना आवश्यक है। (Duck Farming) बतख पालन करने वाले को चाहिए की वो बतख को उचित मात्रा में पौष्टिक आहार दे जिससे की वो अच्छे से बढ़ें और ज्यादा से ज्यादा अंडे दें। छोटे स्तर पर (Duck Farming) बतख पालन की शुरुआत कर रहे लोग रसोई का बचा हुआ खाना भी इस्तेमाल कर सकते हैं मगर अच्छे ग्रोथ और उत्पादन के लिए अच्छा और भरपूर मात्रा में खाना आवश्यक है।

बतखों का इलाज व देखभाल :

बतखों की रोग प्रतिरोधक क्षमता अधिक होने के कारण इनमें रोग कम ही होते हैं मगर मुख्य रूप से Duck choloera और Duck flu इनमें पाए जाते हैं जिस से इनको बुखार हो जाता है और बुखार से इनकी मृत्यु होने लगती है। इससे बचाव के लिए चूजे जब एक महीने के हो जाएँ तो उन्हें वैक्सीन लगवा देना चाहिए जिससे वो इन खतरों से दूर रहे।  Duck Farm की नियमित सफाई की जानी चाहिए और नियमित रूप से कीटनाशक का छिड़काव किया जाना चाहिए।

आगे के विषय में पूछने पर संजीव जी कहते हैं की डक फार्मिंग (Duck Farming) उन्हें बहुत अच्छा लग रहा है वो इसी को और आगे बढ़ाना चाहेंगे और साथ ही साथ वो (Duck Farming) के बारे में और ज्यादा जानकर कोशिश करेंगे जिसे वो अपने हित में भी लाएं और नए पालकों को भी राह दिखाएं।  पुराने पालकों से वो कहते हैं की हर कोई एक समय नया होता है तो अगर उनके पास Duck Farming सम्बन्धी जानकारी है तो वो नए पालकों से भी साझा करें जिससे वो भी अपने रोजगार को गति दे सकें।