bengali dada ka mutton dhaba patna

धरती पर मांसाहार खाने वालों का अस्तित्व बहुत पुराना है | हर सदी के साथ मांसाहार पकाने के तरीके में बदलाव आया. भारत पर अनेकों आक्रमण हुए. इन हमलों से भारत की संस्कृति में भी कई बदलाव हुए, ख़ास कर रसोई के अन्दर. यही वजह है कि देश के हर एक कोने में एक अलग तरह का स्वाद है. और जब बात मटन की हो तो उंगलियां कम पड़ सकती हैं पर विधियां नहीं. ऐसे ही चटकारेदार विधि पटना के बंगाली दादा के पास है ऐसा जादू कि जो Benagli dada ka mutton एक बार खाए, दोबारा जरुर लौट के आए.

Bengali Dada ke Mutton में शुद्धता की है पूरी गारंटी

हार्डिंग पार्क और ईको पार्क के बीच में पड़ता है सचिवालय, जिसके सामने, रोड किनारे मशहूर बंगाली दादा का ढाबा स्थित है. बंगाली दादा के नाम से मशहूर संजय पिछले 40 सालों से मटन बना और खिला रहे हैं. 20 रूपए में दो पीस मटन और चावल/रोटी वाली थाली का दाम बढ़कर 120 रूपए हो गया, पर ज़ायका ज़रा-सा भी नहीं बदला.

बंगाली दादा बताते हैं, “ पिताजी ने शुरुआत किया था. बाद में हम संभालने लगे. आज भी सारा मसाला घर पर मिक्सी में ही पीसते हैं. सुबह 5 बजे उठते हैं और पत्नी की मदद से सब तैयार करते हैं.”

mutton thali

खाने का स्वाद गरम-गरम ही आता है. यही कारण है कि दादा के ढाबे पर चूल्हा जलता ही रहता है. हर दिन करीबन 500 लोगों को मन-भर मटन खिलाने के लिए अदालतगंज से 70 किलो मीट लाते हैं. ग्राहकों को किसी भी प्रकार की कोई शिकायत न हो इसलिए हर एक चीज़ का ख़ास ख्याल रखा जाता है.

बंगाली दादा का मटन खाने के लिए लगी भीड़ इस बात का सबूत है कि स्वाद फैंसी रेस्टोरेंट में ही मिले ये जरुरी नहीं है. अच्छा खाना बनाने के लिए साफ़-सफाई, नपा-तुला अंदाज़ और अच्छी नियत ही काफी है.

क्या कहते हैं Benagli Dada ka Mutton खाने वाले

Bengali Dada ka Mutton खाने वालों की भीड़ में हर वर्ग के लोग हैं. यहाँ आम हो या ख़ास हर किसी को उनकी पसंद का पीस मिलता है. अपनी प्लेट का इंतज़ार कर रहे हैं हेमंत कुमार कहते हैं, “अभी नया-नया आना शुरू किया है. बहुत बढ़िया स्वाद है. 120 रूपए में 2 पीस मटन और चावल की भरपूर मात्रा है.”

मात के नाम पर बकरा दिया जा रहा है कि खस्सी ये सवाल मन में हमेशा कौंधता है. इसके जवाब में मटन का ज़ायका ले रहे बुज़ुर्ग कहते हैं कि उनको इस बात की गारंटी है कि जो खा रहे हैं शुद्ध है और खस्सी ही है.

एमएलए नीरज सिंह के आरक्षी भी मटन का लुत्फ़ उठा रहे थें. उन्होंने बताया, “ 6-7 साल से आ रहे हैं जब भी सचिवालय में ड्यूटी लगती है. घर का मसाला, घर का स्वाद और क्वालिटी की बदौलत ही यहाँ भीड़ जुटती हैं.”

अब आयी हमारी बारी

आस-पास मौजूद सुगंध और लोगों की बातें सुनकर हमने भी अपनी प्लेट आर्डर कर दी. दो रोटी, थोड़े चावल और पसंदीदा मटन के पीस के साथ फ्री में मिला प्याज का सलाद. पहले निवाला में ही 40 साल के एक्सपीरियंस का स्वाद था. एकदम चटक रंग, बैलेंस्ड मसाला और थिक ग्रेवी के साथ परोसा हर एक मीट का टुकड़ा अच्छे से पका हुआ था.

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सच कह रहे हैं मान लीजिए, जब भी मौका मिले दोपहर के 2:30 बजे से पहले पहुँच जाइए  और Bengali Dada ke Mutton के स्वाद का मजा लीजिये . अगर लेट हुए थोड़ा भी तो भूल जाइये कि चखने को भी मिलेगा, क्योंकि बचता ही नहीं है.