कम लागत में ज्यादा के लिए बेस्ट है SONALI
कम लागत में ज्यादा के लिए बेस्ट है SONALI

बीतें दो सालों में लोग नौकरी से ज्यादा स्टार्ट-अप या कहें कि स्वरोजगार को चुन रहे हैं. प्राइवेट नौकरी करने वाले जीतेंद्र कुशवाहा ने भी SONALI मुर्गी फार्म की शुरुआत की है. फूलवारीशरीफ के बहादुरपुर गाँव के रहने वाले जीतेंद्र के फार्म में गाँव वाले सुकून के साथ मुर्गियां और बत्तख हैं. जिनके सहारे वो अपनी आमदनी को दुगुना करना करने में लगे हैं.

आखिर फार्म क्यों

एक कहावत है कि स्वर्ग में नौकर बनने से अच्छा है नर्क में राजा बनना. जीतेंद्र कुशवाहा कहते हैं कि प्राइवेट नौकरी में कितना भी मेहनत कर ले ऐसा लगता है कि बस कंपनी की ही ग्रोथ हो रही है पर वर्कर की नहीं. इस एक छोटी सी सोच के कारण ही जीतेंद्र ने मुर्गी फार्म की नींव रखी.

जीतेंद्र छोटी लागत में ज्यादा कमाना चाहते थें इसलिए उन्होंने SONALI मुर्गी के चूजों के साथ शुरुआत की. SONALI मुर्गी बेहद ही कम समय और मामूली लागत में बिकने लायक हो जाती है.

कितना आता है खर्च

जब कोई व्यक्ति रसोई में कुछ नया बनाता है तो पहले थोड़ा बनाकर देखता है. स्वाद अच्छा लगने पर ज्यादा बनाता है, ताकि अगर कुछ गलत हो भी जाए तो ज्यादा नुक्सान न हो. इस बात को ध्यान में रखते हुए जीतेंद्र कुशवाहा ने SONALI मुर्गी फार्म की शुरुआत 10 चूजों के साथ की थी. उसके बाद 100 और अब उनके फार्म पर 500 मुर्गियां हैं. ये चूजे वो 32 रूपए पीस के हिसाब से गया से खरीद कर लाये थें.

एक चूजा 70-80 दिनों में 1 किलो का हो जाता है यानि कि बेचने के लिए एक दम तैयार. चूजों को अंडे से बाहर आने के 25 दिनों तक प्री-स्टार्टर दिया जाता है. 25 दिन के बाद स्टार्टर(दाना) दिया जाता है. एक मुर्गी पर दिन का 1 रूपए खर्च होता है, जिसके हिसाब से 80 दिन में 80 रूपए.

BIHARSTORY MEDIA के साथ बात करते हुए जीतेंद्र कुशवाहा
BIHARSTORY MEDIA के साथ बात करते हुए जीतेंद्र कुशवाहा

जीतेंद्र बताते हैं कि वो मुर्गी 70 से 80 दिनों में बेच देते हैं. इसलिए उन्हें वैक्सीन लगवाने की जरुरत नहीं पड़ती है. अगर वो मुर्गी अंडे के लिए पालते तो उन्हें टीकाकरण की जरुरत पड़ती. वैसे एक मुर्गी पर वैक्सीन का खर्च मात्र एक रूपए ही आता है.

मुर्गी के अलावा उनके बनाये दरबे पर जीतेंद्र के कुछ 90,000 रूपए खर्च हुए थें. अपने इस वन-टाइम इन्वेस्टमेंट को वो आसानी से तीन किश्तों में निकाल सकते हैं.

कितना होता है फायदा

जीतेंद्र कुशवाहा बताते हैं कि 500 की लागत में 50,000 हज़ार रूपए बड़ी आसानी से मिल जाते हैं. जोड़कर देखा जाए तो एक मुर्गी पर करीबन 80 रूपए खर्च आता है. वहीँ SONALI मुर्गी का थोक दाम 240-280 रूपए है और खुदरा में ये मुर्गी 380-400 में आसानी से बिक जाती है. जिसका मतलब है 120 रूपए की बचत और ऊपर-नीचे हो भी गया तो 100 रूपए कहीं नहीं गए हैं. जीतेंद्र बताते है कि बाज़ार में SONALI मुर्गी की इतनी डिमांड है कि हाथों-हाथ माल बिक जाता है.

वैसे जीतेंद्र अपने फार्म पर मुर्गी के साथ ही बतख भी पालते हैं. फिलहाल उनके पास 10 ही बतख हैं. वो बताते हैं एक साल में SONALI मुर्गी करीबन 200 अंडे ही देती है. एक अंडा 12 से 15 रूपए में बिकता है. वहीँ बतख साल भर अंडे देते हैं.

जीतेंद्र की सीख

किसी आम इंसान की तरह प्राइवेट नौकरी करने वाले जीतेंद्र का अपना फार्म है. जो उनकी आय को डबल कर रहा है. जीतेंद्र बताते हैं कि स्वरोजगार के कई मौके हैं, जरुरत है तो आस-पास नज़र घुमाने की. जब हमने उनसे पूछा कि वो छोटे व्यापारियों को क्या सलाह देना चहते हैं तो उन्होंने बताया कि जरुरी है बिज़नस कोई भी हो पर छोटे लेवल पर ही शुरू होना चाहिए. इससे बिज़नस से जुड़ी बारीकियों को समझना का मौका मिलता है.

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हमें लगता है कि इतनी जानकारी और अनुभव बहुत होगा अपने सपनों को उड़ान देने के लिए, तो बस अब सोचिये, समझिये और शुरू कीजिए.