GOAT FARMING अब नहीं रहा गरीबों वाला बिज़नस
                                GOAT FARMING अब नहीं रहा गरीबों वाला बिज़नस

मानव हमेशा प्रकृति पर आश्रित रहा है. समय चाहे आज का हो या आदिकाल का, कभी भोजन, कभी मनोरंजन और कभी-कभी तो आमदनी के लिए भी मनुष्य ने पशुओं का इस्तेमाल किया है. आज भी एक बहुत बड़ी आबादी रोजी-रोटी के लिए पशुपालन पर निर्भर है. इसका एक उदाहरण फुलवारीशरीफ के रहने वाले सोनू नाज़ का Goat Farm है. बतौर ओला ड्राईवर काम करने वाले सोनू ने Goat Farming की शुरुआत एक्स्ट्रा इनकम के लिए की थी.

कैसे करें Goat Farm तैयार

पेशे से ड्राईवर सोनू समाज-सेवा में ख़ासा दिलचस्पी रखते हैं. लोगों की मदद करने के लिए उन्हें कई बार पैसों की भी जरुरत पड़ती है. Goat Farming शुरू करने के पीछे ये भी एक बहुत बड़ा कारण है. हरे-भरे खेत के बीच में सोनू ने लगभग 75 फीट लंबा और 20 फीट चौड़ा Farm तैयार किया है. फूस और तैयार ये Farm चार हिस्सों में बंटा हुआ है.

GOAT FARMING में साफ़-सफाई का रखना होता है पूरा ध्यान
GOAT FARMING में साफ़-सफाई का रखना होता है पूरा ध्यान

सोनू बताते हैं, “Farm की शुरुआत करने का उद्देश्य कमायी को दोगुना करना है. ऐसे में जरुरी है कि कम खर्चे में ज्यादा आमद हो. साथ ही Farm में इस्तेमाल किया गया ज्यादा से ज्यादा सामान recycled और एनवायरनमेंट फ्रेंडली होना चाहिए.”

किन बातों का रखें ध्यान

Goat Farm तैयार करना भले ही राकेट साइंस न हो पर कुछ बातों का ध्यान रखना बेहद जरुरी है. सोनू नाज ने अपना Farm बेहद ही व्यवस्थित तरीके तैयार से किया है. Farm पांच हिस्सों में बंटा है. पहला कमरा टेम्पररी है जोकि पहरेदार के लिए बनाया गया है. बाकी चार हिस्सों में उम्र के हिसाब से नर और मादा को अलग-अलग करके रखा गया है.

बारीकियों पर ध्यान देकर किया जा सकता है बेहतर फार्म तैयार
बारीकियों पर ध्यान देकर किया जा सकता है बेहतर फार्म तैयार

Farm की दीवार फूस के ऊपर मिट्टी की मोटी परत के साथ तैयार की गयी है. इस तरीके से बकरियों को गर्मी के साथ ही आग के खतरे से भी बचाया जा सकता है. पूरा Farm बनाने में करीबन 110 पीस बांस और 230 झलासी लगी है. 10 दिन में तैयार इस Farm की छत पांच लेयर में बनायी गयी है जिसमें बांस, पतले फट्टे, फूस, प्लास्टिक और आखिर में फिर से फूस की एक लेयर लगायी गयी है.

वेंटिलेशन को ध्यान में रखते हुए Farm में पीछे की तरफ जाली लगायी गयी है. साथ ही अराजकतत्वों से बचाने के लिए तिरपाल और पुराने पोस्टर लगवाए हैं. सोनू द्वारा तैयार किय गए इस Farm में 10,000 की लागत लगी है. वैसे इसे कम करने के लिए सोनू ने कई पुराने चीजें इस्तेमाल की हैं, जैसे कि टिन और बैनर.

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Farm में पानी और बिजली की कमी न हो इसलिए बिजली और पानी का कनेक्शन लेना भी जरुरी है. सोनू बताते हैं कि एग्रीकल्चर कोटे पर लेने से बिजली की दर कम आती है. वैसे बकरियों को बारिश से बचाने के लिए उनके बाड़ों को उंचाई पर बनाया जा रहा है ताकि उन्हें भीगी जमीन में न बैठना पड़े.

सोनु की सलाह

सोनु नाज़ का GOAT Farm एक आदर्श Farm है. अलग-अलग ब्रीड के बकरे और बकरियों के लिए उन्होंने कई इंतजाम किये हैं. अच्छी सेहत के लिए सोनू उन्हें भूंसा, चना का छिलका और चोकर खिलाते हैं. 50 बकरियों का टारगेट लेकर चल रहें सोनू के पास सबके लिए सलाह है. सोनू कहते हैं कि खुद के बिज़नस की शुरुआत करने से पहले हर एक दिमाग में बस इतनी बात होनी चाहिए कि पहला निवेश हमेशा छोटा हो. इससे गलती होने पर ज्यादा नुकसान नहीं झेलना पड़ता है साथ ही बिज़नस की बारीकियों को समझने का भी अवसर मिलता है.