FISH FARMING के गुरु अपने चेले के साथ
FISH FARMING के गुरु अपने चेले के साथ

दुनिया में दो तरह के लोग होते हैं. एक वो जो पैसों के लिए काम करते हैं, दूसरे वो जिनके लिए पैसा काम करता है. विश्वंभरपूर के रहने वाले सोनू दूसरी केटेगरी में आते हैं. बीते दस सालों से FISH FARMING कर रहे सोनू आज इस बिज़नस के गुरु कहलाते हैं. वैसे ऐसा बिल्कुल भी नहीं है कि उनसे पहले इस इलाके में किसी ने FISH FARMING नहीं की थी पर बस कोई टिका नहीं.

10 कट्ठे से 10 बीघा का सफ़र

Fish Farming के गुरु कहलाने वाले सोनू पहले Medical Representative यानि MR की नौकरी करते थें. वो बताते हैं, “हर महीने की 5 तारीख को ऑफिस में मीटिंग होती थी. एक बार मीटिंग के दौरान बातों-बातों में किसी ने कहा कि छोटा हो पर अपना बिज़नस और खुद का मालिक होना बेहतर है. आदमी बड़ा तब बनता है जब कोई दूसरा उसके लिए दिन-रात काम करे.” ये बात मेरे मन में छप गयी.

2017 में पहला तालाब खुदवाया. ये तालाब 10 कट्ठे का था. उस वक्त किसी को भी सोनू की कोशिशों पर विश्वास नहीं था. पर खुद पर विश्वास का ही नतीजा है कि कुछ ही दिनों में 10 कट्ठे का तालाब 10 बीघे में तब्दील हो गया.

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सोनू ने ये तालाब बनाने की शुरुआत अपनी ज़मीन से की थी इसलिए उन्हें ज़मीन खरीदनी या लीज़ पर नहीं लेनी पड़ी. बिज़नस बढ़ने के बाद उन्हें ज्यादा ज़मीन की जरुरत महसूस हुई जिसके लिए उन्होंने ज़मीन लीज़ पर खरीदी.

मछली पालन में इन बातों का रखे ध्यान

मछली बिना पानी के जिंदा नहीं रह सकती. आर्टिफिशीयल तालाब के लिए अच्छी ज़मीन की जरुरत पड़ती है. अगर ज़मीन अपनी हो तो बल्ले-बल्ले वरना ज़मीन लीज़ पर ली जा सकती है. ज़मीन का दाम बेहद ही वाज़िब होता है. लीज़ व्यक्ति अपने अनुसार 4 से 5 या उससे ज्यादा सालों के लिए ले सकते है. हाँ, कॉन्ट्रैक्ट में सभी बातें जरुर लिखवा ले और इस बात का ध्यान रखें कि ज़मीन के मालिक की बिज़नस में किसी भी प्रकार हिस्सेदारी नहीं होती है.

फिश फार्मिंग का दूसरा स्टेप तालाब खुदवाना है. इसके लिए अच्छी मिट्टी का चुनाव करना बेहद जरुरी है. मछली पालन के लिए काली मिट्टी, केवाल मिटटी और धूमट मिट्टी तीनों ही अच्छी होती है. मिट्टी बंजर हो या उपजाऊ इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता है. तालाब के लिए मिट्टी चुनते वक्त बस पानी की खपत का ध्यान रखना होता है. जैसे कि काली मिट्टी में कम पानी लगता है और धूमट मिटटी में ज्यादा पानी की जरुरत होती है.

तालाब JCB और ट्रेक्टर की मदद से खोदा जा सकता है. इन दोनों ही अलग-अलग तरीकों का असर जेब के साथ ही तालाब की क्वालिटी पर भी पड़ता है. जैसे की 10 कट्ठे ज़मीन पर तालाब खुदवाने का खर्च 50-60 हज़ार रूपए तक आता है. वैसे JCB की खुदाई का सबसे बड़ा नुकसान होता है मोटी दीवार. जिसके ढहने का डर बहुत ज्यादा होता है.

ट्रेक्टर से तालाब खुदवाने में 10 हजार यानि कि 70,000 का खर्चा होता है. पर इस तालाब में 80 प्रतिशत पानी और 20 प्रतिशत दीवार के लिए जगह होती है. तालाब की लंबाई-चौढ़ाई व्यक्ति अपने हिसाब से रख सकता है. साथ ही अगर तालाब की गहराई 6 फीट है तो उसमें पानी एक फीट कम यानि कि पांच फीट होना चाहिए.

सोनू की सलाह

Fish Farming के गुरु कहलाने वाले सोनू 6 बीघे में नया तालाब खुदवा रहे हैं. फिलहाल 10 बीघे में दो नर्सरी पौंड और 3 फार्मिंग पौंड है. नर्सरी में फ़िलहाल पंगास मछली है और उसके अलावा फार्म पर रोहू, कतला, क्रास और नैनी मछली उपलब्ध है. सोनू फिश फार्मिंग में इंटरेस्ट रखने वाले लोगों को सीड और फीड दोनों सप्लाई करते हैं. साथ ही जरुरत पड़ने पर लोगों की मदद भी करते हैं. सच कहें तो बिज़नस को शुरू करने के लिए सोनू की सलाह ही काफी है.

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और वो कहते हैं कि शुरुआत हमेशा थोड़े से ही करने में फायदा है.