Archives for Issues & Discussions

Doing The Different

असम का एक ऐसा स्कूल जहाँ बच्चों से फीस के बदले लेते है प्लास्टिक के कचरे | असम में एक दम्पति के दवारा चलाया जाने वाला अक्षर स्कूल जहाँ बच्चों के बीच फैलाई जा रही है प्लास्टिक के कम उपयोग के प्रति जागरूकता |

आज पर्यावरण संरक्षण की स्थिति दिन व दिन खत्म होती जा रही है | हर कोई पेड़ पौधे से लाभ ले रहे है पर उनके संरक्षण के लिय कोई नहीं…
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Dynamic Youths

पत्रकारिता छोड़कर शुरू किया एक जागरूकता अभियान जहाँ सिखाते है ट्रैफिक के नियम ( Traffic Rules ) का पालन करना |  250 से अधिक स्कूलों और कॉलेजों में ट्रैफिक नियमों  से बच्चों और युवाओ को जागरूक कर चुके है युवा ऋषभ आनंद |

आज भारत में ट्रैफिक Traffic Rules तोड़कर आगे निकल जाना ये आम बात हो गयी है  ये जानते हुए भी की आगे दुर्घटना का शिकार भी हो सकता है फिर…
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Dynamic Youths

जागरूकता की बदौलत पिछले कुछ सालों में भारत में स्वच्छता के परिदृश्य में एक बड़ा बदलाव हुआ संभव | 'स्वच्छ भारत अभियान या मिशन', जो एक मिसाल के रूप में उभरकर आज आ रहा है सामने |

कुछ वर्षों से लगातार पूरी दुनिया में भारत की छवि एक ऐसे देश के रूप में बन रही , जहां पर गंदगी और प्रदूषित वातावरण की समस्या वक़्त  के साथ-…
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हम 1 मई को ही मई दिवस या मजदूर दिवस ( Labour Day )के रूप में क्यों मनाते हैं? मजदूर का मतलब सिर्फ कीचड़ से सना हुआ इंसान नहीं बल्कि फाइल की बोझ से दबा हुआ इंसान भी होता है |

मजदूर  का मतलब सिर्फ कीचड़ से सना हुआ इंसान नहीं बल्कि फाइल की बोझ से दबा हुआ इंसान जो किसी संस्थान  के लिया  काम करता है और उसके बदले वो…
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जलियांवाला बाग ( Jallianwala Bagh ) की वो शर्मनाक नरसंहार, जिस पर 100 वर्ष बाद ब्रिटेन को आई शर्म ब्रितानी सरकार के रिकॉर्ड के अनुसार इस अंधाधुंध गोलीबारी में कम से कम 379 लोग मारे गए जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल थे | हालांकि सूत्रों का कहना है कि इसमें तक़रीबन 1000 लोगों ने अपनी जानें गंवाईं थीं

जलियांवाला बाग ( Jallianwala Bagh ) हत्याकांड ब्रिटिश इतिहास का वो बदनुमा पन्ना है जिसका जिक्र ही अंग्रेजों के लिए शर्मिंदगी का सबब है |  जो अंग्रेज भारतीयों को सभ्य…
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सिसकती और सहमी हुई (Red Light Area) रेड लाइट एरिया की सच्चाई रेड लाइट एरिया कमाठीपुरा की तंग और सहमी गलियों में सिसक रही हैं, ना जाने कितनी ही मज़लूम औरतों की मजबूरियां

मुंबई (Mumbai) की चकाचौंध के बीच मौजूद कमाठीपुरा, इंसानियत और समाज दोनों के चेहरों पर ही एक झन्नाटेदार तमाचा है. एशिया के सबसे पुराने (Red Light Area) रेड लाइट एरिया…
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आखिर कहाँ गए प्राकृतिक सफाईकर्मी ‘गिद्ध’ गिद्धों की मौत का मुख्य कारण पशुओं को दी जाने वाली दर्द निवारक दवा डाइक्लोफेनेक है

प्रकृति के सफाईकर्मी (Natural Cleaner) माने जाने वाले गिद्ध (Vulture) विलुप्ति की कगार पर पहुंच चुके हैं | पर्यावरण के रक्षक के रूप में पहचानी जाने वाली गिद्ध (Vulture) प्रजाति…
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धर्म के नाम पर अंधविश्‍वासों का बोलबाला कुछ इस तरह गधे की कब्र किसी पहूंचे हुए फकीर की समाधि बन गयी। ऐसे वर्ष बीते, वह बंजारा बहुत धनी हो गया।

एक फकीर किसी बंजारे की सेवा से बहुत प्रसन्‍न हो गया। और उस बंजारे को उसने एक गधा भेंट किया। बंजारा बड़ा प्रसन्‍न था। गधे के साथ, अब उसे पेदल…
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आज है विश्व पर्यावरण दिवस, और इस बार का संकल्प प्लास्टिक के प्रदूषण से धरती को दूर रखना है इस दिन को मनाने की घोषणा साल 1972 में संयुक्त राष्ट्र ने की थी |

पूरी दुनिया में 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस (World Environment Day) मनाया जाता है। इस दिन को मनाने का लक्ष्य लोगों को पर्यावरण संरक्षण और उसकी सुरक्षा के प्रति…
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