Tag archives for समृधि

ईश्वरलाभ की संपदा

एक गांव में एक लकडहारा रहा करता था।वह हर रोज जंगल में जाकर लकडी काटता और उसे बाजार में बेच देता। किन्तु कुछ समय से उसकी आमदनी घटती चली जा…
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Inspiring Thoughts

नैसर्गिकता का आलिंगन करो : स्वामी चैतन्य कृति

"बर्नार्ड शा  ने कही एक बार कहा था कि 'मैं ऐसी  सभ्यता का अथवा महानता का क्या करू, जिसमे मुझे किसी चौराहे पर नाचने में शर्म आती हो या प्रतिबन्ध हो. मुझसे अच्छे तो वे आदिवासी लोग है जो…
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