जिस उम्र में लोग खेल-कूद, मौज-मस्ती और पढ़ाई-लिखाई पूरी करने पर लगे होते हैं उसी उम्र में सुहास गोपीनाथ ने एक सपना देखा और फिर दिन रात एक कर जुट गये…
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